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नारी तेरी यही कहानी!

"मीना, तुम्हारे बच्चे कैसे हैं?" 

"..... बीबीजी, मेरा छोटा तो खत्म हो गया!!"

सुन कर मेरे पैरों तले से जमीन खिसक गई। 
मीना। 
चार साल पहले मेरे यहाँ काम करने आई एक दुबली-पतली बिहारन। 

- "बीबीजी घरवाला तो मेरा कुछ कमाता नहीं। जो मैं कमा कर ले जाती हूँ वह भी छीन लेता है। ऊपर से लड़का न पैदा करने पर ख़ूब मारता है।" 

हमारे भारत में नारी शक्ति के नाम पर जलसे समागम होते हैं, नारे लगाये जाते हैं । परन्तु निन्यानवें प्रतिशत औरतें शोषण का शिकार होती हैं यह हम जानते हुए भी नहीं मानना चाहते! 

-"क्या बोल रही है तू? लड़का ख़त्म हो गया? पर कैसे?"

- "क्या बताऊँ बीबीजी काम पर आई तो ३ महीने का नवजात न जाने कैसे चारपाई से लुड़क कर पास पड़ी पानी की बालटी में गिर गया!"

मुझे अपने कानों पर विश्वास नहीं हो रहा था। हमारे घरों में तो इतने छोटे बच्चे को कभी अकेला नहीं छोड़ते। 

-"घरवाला तो कुछ कमाता नहीं। मैं काम करके चार पैसे लाती हूँ तो घर में चूल्हा जलता है। उस दिन भी काम पर आई और पीछे से यह कांड हो गया। ऊपर से मेरी सास ने उस दिन मुझे ख़ूब मारा.....।"


उसकी दशा मुझसे देखी न जा रही थी। मैं कुछ बोलने के लिए शब्द ढूँढ ही रही थी कि उसने अपने आँसू पोंचे और झाड़ू-पोचा करने लगी। 

औरत को भगवान ने जितनी सहनशीलता दी है, सहन करने को उससे भी अधिक दुख दिए हैं। 

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